जब भी हम प्रदूषण का नाम सुनते हैं डेल्ही का नाम जरूर आता है. दिल्ली भारत की राजधानी है जो कई चीजों के लिए फेमस है जिनमें से प्रदूषण भी एक है.

चाइना के बीजिंग के बाद दिल्ली दुनिया के सबसे प्रदूषित शहरों में से एक आता है, जो कि भारतवासियों के लिए एक शर्मनाक बात है. दिल्ली के इतिहास में नवंबर 8 2017 1 कैरेट लीटर दिवस के नाम है

दिल्ली का एयर पोल्लुशपन लेवल ९९९ होगया है जो की साधारण लेवल से कई गुना ज़्यादा है.
एयर पोल्लुशण का इंडेक्स ज़्यादा से ज़्यादा १०(10) से ६०(60)के बीच होना चाहिए जो दिल्ली में ९९९(999) है .

दिल्ली का एयर पोल्लुशपन लेवल ९९९ होगया है जो की साधारण लेवल से कई गुना ज़्यादा है.
एयर पोल्लुशण का इंडेक्स ज़्यादा से ज़्यादा १० से ६००के बीच होना चाहिए जो दिल्ली में ९९९ है .

दिल्ली में प्रदुषण के कारन

1.  बची हुई केथी को जलना

दिल्ली में प्रदुषण का मुख्या कारन पास की राष्ट्र जैसे हरयाणा और उत्तर प्रदेश में बची जुई खेती को जलना है. किसान हर साल खरीफ मौसम के अंत में चावल के बची हुए कुटी को जलदेते है जहा से सारा धुवा दिल्ली के और रुख करता है. यह धुआँ जब दिल्ली के ट्रैफिक के धुआँ के सात मिलता है थो अधिक हार्निकारक समाज के रूप में बदल जाता है. यह स्मोग दिल्ली वासियों को सांस लेने में भी मुश्किलें पैदा करता है.

2. ट्रैफिक पोल्लुशण

दिल्ली में अनगिनत CNG ऑटो रिक्शा है जो प्रधुशं काम करने में मदद करते है . लेकिन दिल्ली के आबादी इतनी ज़्यादा है के यह ऑटो रिक्शा पूरी सीमा में काम नहीं कर पा रहे है.दिल्ली में मोटर साइकिल , कार और बसेस से निकल ने वाला कलुषित धुआँ दिल्ली के ऊपर खतरनाक परदे की तरह जैम गया है . पिछले दो दशक में इनकी गिनती कई गुना बढ़ गयी है जो दिल्ली के प्रदूषण में और भी बड़ाई कर रही है.

3. दिल्ली के प्रधुसन में सर्दी का असर

दिल्ली में सर्दी के दौरान हवा नमी के कारण भरी होजाती है. जिसका असर प्रधुसन पे बहुत हानिकारक है. जब हवा भारी होजाती है तब स्मोग से आये हुए सुक्ष पदार्थ उसमे मिलजाते है जो सांस लेने में और भी दिक्कत पैदा करते है. यह धुसयता काम करदेते है और इसके कारण हाईवे पर कई सारे मोटर कैलक्ले और कार के दुर्घटना होजाती है .

4. आबादी का असर

दिल्ली भारत का अधिक आबादी शेशरों में से एक है जो हवा प्रदूषण और शोर आसानी से बड़ा देता है .

5. पब्लिक इंफ़्रा स्ट्रक्चर में कमी

दिल्ली भारत के राजषानी होने के बाद भी सरकार जानत के परिवहन (ट्रांसपोर्टेशन ) के लिए सुविधाएं पूरी नहीं कर पा रही है . जब सर्कार के ट्रैन, मेट्रो और सरकारी बसेस उपलब हो तब जनता अपने वहां जैसे कार स्कूटर का काम इस्ते माल करेगी और प्रदूषण काम करने में विकास होगा

6. अधिक ईमारत का निर्माण

दिल्ली में और दिल्ली के अस्स पास के जागा में कई सारे बुलिडिंग के निर्णाम के कारण रेती और सीमेंट लाने लेजाने में कई वहां चलते है जिनसे प्रदूषण और भी बाद जाता है

7. आद्योगिक प्रदूषण (िन्दुअतरिअल पोल्लुशण )

दिल्ली में और दिल्ली के आस पास के शहरों में कई साड़ी िंदुस्तरीय है जो धुआँ और टॉक्सिक वास्ते पानी में छोड़ देती है जिसकी वजह से हवा और पानी प्रदूषण बाद जाट है . राजधानी होने के बाद भी अभी तक दिल्ली में सही तरह का कूड़ा कचरे को निपटाने का सही तारीख नहीं है

8. दिवाली

ख़ुशी का त्यौहार होने के बाद भी दिल्ली में पटाखों के कारण दिवाली अक्सर धुआँ प्रदूषण फैला देती है .

दिल्ली में प्रदूषण का परिमाण

AQA Index दिखाता है हमें कि दिल्ली का प्रदूषण नॉर्मल से 300% और भी हानिकारक है महक जो हाइवे पर अधिकतर कई सारे दुर्घटना का कारण बनती है वह कई सारे रेल भी कैंसिल करवा देती है वैसे ही कई सारे फ्लाइट भी अधिकतर कैंसिल हो जाते हैं या फिर ढीले हो जाते हैं.

दिल्ली के हाईवे पर अधिकतर हम देखते हैं की कांच की एक्सीडेंट में लाइन लग जाती है. दिल्ली के चीफ मिनिस्टर ने दिल्ली को हिटलर के गैस चैंबर से तुलना की है जो की है

एक आम आदमी के लिए ये तुलना गलत नहीं है . इस धुए के कारण कई सारे दिन स्कूल और कॉलेजेस बंद करदेना पड़ता है. जिसके वजह से छात्रों को कई कष्ट झेलने पढ़ते है.

दिल्ली में हवा का प्रदूषण इतना बढ़ गया है की अमेरिका के अफसर जो दिल्ली में काम करते है वह अपने घर और कार्यालय में एयर पूरिफिएर का इस्ते माल करने लगे है . एक आम नागरिक को सांस लेने में भी कई मुश्किल होजाती है .

वैद्यों का कहना है की की दिल्ली में रहना यानी हर दिन ५० सिगरेट पिए का मुताबीक है. जो दिल्ली को एक इमरजेंसी घोषित करने के मुताबिक़ है दिल्ली का प्रदूषण इतना बढ़ गया है के क्रिकेट मैच खेल रहे खिलाड़ी बॉल न दिखने के कारन मैच को बंद कारन बंद करना पढ़ा .

भारत और श्री लंका के युवा खिलाड़ी भी रौशनी के कमी के कारण खेल को बंद करदिया. यह घटना बैठी है की दिल्ली का प्रदूहन अब कोनसी सीमा पार कर चूका है

दिल्ली में प्रधुसहान का आकड़ा

एयर क्वालिटी इंडेक्स बताता है की कोई भी संख्या १५० सहित के लिए अछि नहीं है. ३०० से ज़्यादा बीमार कर सकती है और जान लीजिये दिल्ली में ९९९ की संख्या आम इंसान के लिए कितनी हानिकारक है जो साधारण रूप में होनी चाहिए दिल्ली में वह तीन गुना ज़्यादा है.

दिल्ली में , पि एम् २.५ लेवल १२०० माइक्रो ग्राम ज़्यादा है प्रति क्यूबिक मीटर में. यह ४८ गुना ज़्यादा है निम्न रूप से .

धुंध (स्मोग ) का असर

दिल्ली वासियों को यह बताने की ज़रूरत नहीं के ढूंढ का असर कितना हानिकारक है. हम देख सकते है कई सारे यात्री और दिल्ली वासी मास्क पहनकर अपना गुज़ारा करते है.

नवंबर के महीने में हम देख सजते है की यह धुंध का असर कितना प्रदूषण फैला ता है नवंबर 8 2017 में जब प्रदूषण का असर सबसे ज़्यादा बढ़ गया था हर हॉस्पिटल के आगे कई सारे मरीज़ की लाइन लग गयी थी . सब को सांस लेने में हे तकलीफ हो रही थी और कई सारे लॉगिन की माउथ का कारण भी यही प्रदूषण है.

प्रशशण के कारण सर दर्द गले में दर्द खांसी ज़ुकाम फेफड़ो की कजोरी आसक्ति है .

धुंध को काबू करने के खड़ाम

दिल्ली सरकार बड़ी संकट में पढ़ गयी और अपने आस पास के राज्यों को घोषित दिखने लगी. यह बात भी सच है के खेती जलाने के कारण प्रदूषण बाद जाता है. लेकिन खेती को जलना सारे देश में एक आम बात है. दिल्ली की परिस्थिति पहले से खतरनाक थी जोकि इस खेती के जलने से आये हुए धुए ने और भी हानिकारक बना दी.

  • नशनकल डिजास्टर मैनेजमेंट अथॉरिटी ने इस प्रदूषण और धुंध का असर को को काम करने के लिए कुछ सूचना दी है:
  • सुबह के समय घर से ना निकले जब धुंध ज़्यादा हो
  • सूरज निकल ने के बाद ही घर से बहार निकले
  • सांस लेने में किसी भी तरह की कमी हो थो तुरंत हे अस्पताल जाके वैद्य की सलाह ले
  • बच्चों और बूढ़ों को घर से ज़्यादा बहार न निकलने दे
  • विटामिन c ज़्यादा मिलने वाले फल का सेवन करे
  • खूब सारा पानी पिए
  • सिगरेट या खुदा कचरा न जलाये
  • अपने चेहरे पे मास्क का इस्तेमाल करे
  • जहा धुंध का असर ज़्यादा हो उस जगह से पाबन्दी करे

इतना असर होने के बाद भी दिल्ली मूल रूप से इस ढूंढ और धुए को काम करने के लिए कोई भी अमली प्रयास नहीं कर रही है. इस धुए और धुंध को काम करने के लिए कई सारे पेड पौधे लगाए हरियाली बढ़ाये . हानिकारक ईंधन का इस्ते माल काम करे और अधिक से अधिक सरकारी वहां का इस्तेमाल करे

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