कंप्रेसर एसी की जान होती है साधारण कंप्रेसर एक सामान्य एसी में बंद और चालू होते रहता है हर एसी में तापमान सेट करने का गुण होता है जब भी एक सामान्य सी उच्च तापमान पर जो पहले से सेट किया गया है पहुंच जाता है तब कंप्रेसर अपने आप बंद हो जाता है और तब तक बंद रहता है तब तक तापमान उस सेट किए गए तापमान से बढ़ नहीं जाता फिर जब तापमान अधिक बढ़ जाता है तब कंप्रेसर चालू होकर होती है और फिर से कमरा ठंडा होने लगता है

इनवर्टर एसी का परिचय

इनवर्टर एसी की खास बात यह है कि इन एसी में कंप्रेसर चालू और बंद नहीं होता रहता है .नॉन इन्वर्टर ऐसी में हमेशा चालू रहता है.

यह सवाल आपको आएगा की कंप्रेसर बंद ना होने पर इसी अच्छा कैसे होगा ? आई आपको समझाते हैं

इस प्रक्रिया को कार के एक्सलरेटर के उदाहरण से मान लीजिए आप एक कार में जा रहे हैं और कार की स्पीड अधिक है तब आप अपना पैर एक्सलरेटर से थोड़ा निकाल देंगे और कम होने पर गाड़ी की स्पीड कम हो जाती है या फिर अधिक से ज्यादा फिर रहने पर आप ब्रेक का इस्तेमाल करेंगे वैसे ही जब आपको कार की स्पीड बढ़ानी हो तब आप एक्सेल रेटर पर पैर रखकर और फिर जब आएंगे ताकि फिट और भी बड़े इनवर्टर एसी भी कुछ इसी प्रकार काम करते हैं

इनवर्टर एसी और नॉन इनवर्टर एसी में अंतर

यह बहुत अच्छा सवाल है आइए जानते हैं इन दोनों में अंतर क्या है इन दोनों में बुनियादी अंतर यह है कि इनवर्टर एसी का कंप्रेसर लगातार चालू रहता है और कभी बंद नहीं होता और नॉन इनवर्टर का कंप्रेसर चालू और बंद होते रहता है

इनवर्टर एसी का कंप्रेसर अलग-अलग स्पीड से चलता है और नॉन इनवर्टर का एसी सिर्फ एक ही स्पीड से चलता है जो पहले से तय कर दिया होता है इनवर्टर एसी में हम अपने कमरे के आकार के हिसाब से इसकाटोनज बदल सकते हैं लेकिन एक नॉर्मल एसी में खूबी नहीं है

यह तो इन दोनों में मूल अंतर है आइए जानते हैं कि एक नॉर्मल एसी और इनवर्टर वाला एसी काम कैसे करते हैं इस चीज को समझने के लिए आपको   यह अंतर जाना पड़ेगा कि एक नॉर्मल एसी और इनवर्टर एसी के तकनीकी काम करने का तरीका.

एक नॉर्मल एसी का काम करने का तरीका विंडो एसी तो कई दशक पहले ही कम हो गए हैं आजकल लोग स्प्लिट एसी या डक्टलेस एसी का इस्तेमाल ज्यादा कर रहे हैं जैसे कि टेक्नोलॉजी और भी आगे बढ़ रही है इसी में भी कई नई प्रकार के किसी आ रहे हैं

आइए जानते हैं कि स्प्लिट एसी काम कैसे करता है: एसी काम करने के तीन सिद्धांत है वह ेवपोरशन कंडेंसशन और कम्प्रेशन स्वीट एपी के 2 मुख्य भाग हैं जिसमें से एक घर के अंदर होता है और दूसरा बाहर

एक ऐसा पाइप जिससे तापमान बाहर नहीं जाता वह पाए बाहर रखे हुए भाग और अंदर रखे हुए इसी के भाग को जोड़ता है यह रिक्रूटमेंट के द्वारा ठंडी हवा को घर के अंदर भेजता है और गर्म हवा को बाहर

बाहर रखे हुए एसी के भाग

इससे यह बात तो तय है कि रेफ्रिजरेंट को बार-बार ठंडा करना पड़ता है और कंडेंस करना पड़ता है इस चीज के लिए एक फैन की मदद से बाहर रखा हुआ इसी का भाग हवा को खींचता है और रेफ्रिजरेंट को ठंडा करता है यह प्रक्रिया जारी रहती है

आइए जानते हैं एक क्लिक एपीके मुख्य भाग

कंप्रेसर

कंप्रेसर एसी की जान होती है स्प्लिट एसी में यह कंप्रेसर बाहर रखा जाता है इस कंप्रेसर का मूल्य कार्य यह है कि यह हवा को अंदर बाहर ले जाता है और रेफ्रिजरेंट को कंडेंस यानी दबाकर ठंडा करता है और एक रूप के जरिए अंदर भेजता है

कंडेंसर कॉइल

कंडेंसर कॉइल बाहर रखे गए इसी के भाग का हिस्सा है यह कॉइल छोटे छोटे पतले ट्यूब होते हैं जिनमें रेफ्रिजरेंट भरा होता है (आमतौर पर फ्रीऑन) कंडेंसर कॉइल की यह जिम्मेदारी है कि यह अंदर से लिया हुआ गरम ग्यारस को ठंडा कर  उसे पानी में बदलें यह जो गर्मी को कॉइल लेते हैं कुछ गर्मी  को बाहर की हवा में भेज देते हैं इससे अंदर लगा हुआ इसी का भाग कमरे को ठंडा रखता है

फैन

फैन यह काम है कि वह अंदर के कमरे से गर्म हवा को खींचने और उस हवा की गर्मी को बाहर लगे हुए इसी के भाग के जरिए से बाहर भेजता है

इवेपरेटर कॉइल

इवेपरेटर कॉइल  ऐसी के अंदर लगे भाग्य में रहता है का यह काम है कि यह कंडेनसर से दूसरी दिशा में काम करता है यानी एक कंडेंसर से  रेफ्रिजरेंट से गर्मी के साथ साथ नमी को भी निकालता है जो हवा में रहती है और रेफ्रिजरेंट को पानी से हवा में बदलता है

एयर फिल्टर

एयर फिल्टर का यह काम है कि यह बाहर से आने वाले किसी भी प्रकार के धूल छुपा या हवा से आने वाले कैसे भी पदार्थ को एसी के अंदर आने से रोकता है और कमरे में चलने वाली हवा को साफ रखता है

ड्रेनेज सिस्टम

ड्रेनेज सिस्टम का यह काम है कि रेफ्रिजरेंट को ठंडा और गरम करने के दरमियां किसी भी प्रकार के गंदीगी पैदा होने पर उसे पानी के रूप में इसी के बाहर फेंक देना अगर किसी भी प्रकार का रुकावट इस सिस्टम में आ जाती है तब इसी सही से काम नहीं करता और जब आपको इस सिस्टम में लगे पाइप को साफ कर देने से एयर कंडीशन सही हो जाती है

Refrigeration cycle: 1) condensing coil, 2) expansion valve, 3) evaporator coil, 4) compressor

हमने देखा कि एक स्प्लिट एसी के अनेक विभाग आइए अब समझने की कोशिश करते हैं कि यह काम कैसे करता है स्प्लिट एसी के काम करने के जरिए को हम चार विभाग में बाट सकते है यह प्रकार हैं

एक स्प्लिट एसी के काम करने में पहला कदम यह है कि उसे अंदर लगे गैस को हाई प्रेशर के जरिए गरम लिक्विड में बदलना

दूसरा कदम यह है कि उस गरम लिक्विड को कंडेंस करना इसके दौरान वह गर्म लिक्विड एक कंडेनसर कॉइल से गुजरता है जहां पर उसने लगे तापमान की कटौती होती है और वह लिक्विड ठंडा हो जाता है यह ठंडा लिक्विड अभी भी हाई प्रेशर में ही होता है

इसके बाद वह हाई अचर लिक्विड एक्सपेंशन वाल्व से गुजरता है (यानी छोटे से बड़े होने वाला पाइप) जहां पर हाई प्रेशर लिक्विड को लो प्रेशर लिक्विड में बदला जाता

आखिरी कदम यह है कि वह लो प्रेशर लिक्विड को एक ीवोपोरेटर कॉइल से गुजरना पड़ता है जहां पर उस लिक्विड में जो भी गर्मी है उसे जीत लिया जाता है यह गर्मी गैस को पानी में बदलती है जब यह लिक्विड से गर्मी खींच ली जाती हो तब ठंडा होकर इसी आपको ठंडी हवा देता है

एक साधारण एसी में कंप्रेसर अपनी पूरी क्षमता से काम करता है और कमरे को जितनी तापमान पर सेट किया गया हो उस तापमान में बरकरार रखता है यही प्रक्रिया जारी रहती है  जब तक आप ऐसी को बंद ना करें

इनवर्टर इसी का काम करने का तरीका

इनवर्टर एसी और नॉन इनवर्टर एसी का काम करने का मूल्य का एक ही है लेकिन इन दोनों में प्रमुख अंतर यह है कि इनवर्टर एसी में कंप्रेसर कभी भी बंद नहीं होता यह इस बात का ध्यान रखता है कि आपके एसी यूनिट को जितना पावर चाहिए उतना ही मिलता है और कमरे का तापमान बना रहता है

कितना खबर चाहिए यह इसी कैसे तय करता है यह इस बात पर निर्भर करता है कि अंदर आने वाली हवा कितनी गरम है और थर्मोस्टेट का तापमान कितना सेट किया गया है

Source: Daikin.com

एसी सिस्टम इनवर्टर का इस्तेमाल करके कंप्रेसर के मोटर की सिडको  नियंत्रण करता हैवेरिएबल फ्रिकवेंसी ड्राइव और एडजेस्टेबल इलेक्ट्रिकल इनवर्टर की सहायता से मोटर की स्पीड को नियंत्रण किया जाता है

यह  ऐसी  अल्टरनेटिंग करंट को डायरेक्ट करंट में बदला  है इसे माड्यूलेशन प्रोसेस के जरिए से किया जाता है और जितनी चाहे उतनी फ्रिकवेंसी उपलब्ध की जा सकती है

एसी में अंदर आने वाली हवा का तापमान को लेकर मोटर की स्पीड को तय किया जाता है तब एसी लेने वाला लोड कम ज्यादा होते रहता है इनवर्टर एसी अलग-अलग पीठ से काम करता है लेकिन एक साधारण खेती हर दफा एक ही लेवल जो पहले से शिफ्ट की गई हो उसी लेवल पर काम करता है

इनवर्टर एसी के फायदे

हमने देखा कि इनवर्टर एसी काम कैसे करता है आइए जानते हैं इनवर्टर एसी के फायदे

  1. इन्वर्टर एसी कम से कम बिजली लेता है कम से कम बिजली का इस्तेमाल करता है
  2. इनवर्टर एसी अलग-अलग सीट से और अलग टोनज (tonnage) की क्षमता से काम करता है लेकिन रेगुलर एसी सिर्फ एक ही स्पीड से और एक ही टोनज (tonnage) से काम करते हैं
  3. जिस तापमान पर हम अपना कमरा रखना चाहते हैं इनवर्टर एसी उसी तापमान पर बिल्कुल सही रूप से बरकरार रखते हैं
  4. इनवर्टर एसी 1 रेगुलर एसी की तुलना से बहुत कम आवाज करते हैं

आइए आपको और भी आसान भाषा में समझाते हैं एक साधारण एसी का ज्यादा से ज्यादा क्षमता यानी पीक लोड 1 टन या डेढ़ टन होती है नॉन इनवर्टर एसी का अगर यह क्षमता डेढ़ टन है तब हर समय एक नॉन इनवर्टर एसी 1.5 टन की क्षमता से काम करेगा लेकिन एक इनवर्टर एसी जो कि मोटर की स्पीड अलग-अलग होती है वह तापमान के हिसाब से इसकी क्षमता बदलता है और मोटर की स्पीड को कम ज्यादा करता है आगे जाकर आपको इनवर्टर एसी में काफी ज्यादा बिजली की बचत होती है

एक इनवर्टर एसी के फायदे तो हमने बहुत देखे हैं आइए इसका कुछ कमी भी जानते हैं एक नॉन इनवर्टर एसी की तुलना में इनवर्टर एसी काफी ज्यादा महंगे होते हैं लेकिन हम बिजली की बचत लगभग 30% बचाकर यह खर्च को 2 साल में हम निकाल सकते हैं

बिजली का खर्च : इनवर्टर एसी vs नॉन इनवर्टर एसी

अब बाजार में या ऑनलाइन पर जब भी ऐसी को खोजते हैं तब कई प्रकार के और कई क्षमता वाले एसी आपको मिलते हैं अधिकतर आप 5 स्टार रेटिंग वाले एसी देना पसंद करेंगे जोकि बहुत दिखाओ होते हैं यह माना जाता है

एसी में 1 टन या डेढ़ टन के भी होते हैं हमने इस पोस्ट में यह निम्न यह बताया है कि  3, 4 और 5 स्टार का एसी इनवर्टर और नॉन इनवर्टर एसी कितना बिजली का खर्च होता है

बी ई ई के मुताबिक एक 5 स्टार नॉन इनवर्टर एसी जो कि डेढ़ टन का है वह  1600 घंटों में 1130 यूनिट खर्च करता है वही एक 3 स्टार का इनवर्टर एसी 1600 घंटों में 1077 यूनिट खर्च करता है वही एक 4 स्टार वाला एसी 972 और 5 स्टार वाला यही 815 यूनिट खर्च करता है

इनवर्टर एसी बिजली कैसे बचाता है

जब आप एक साधारण नॉन इनवर्टर एसी को चालू करते हैं तब अगर उसकी क्षमता 1 टन है तब जितनी समय तक वह चालू रहता है वह 1 टन की क्षमता से काम करता है लेकिन जब भी आप

नॉन इनवर्टर एसी का उपयोग करते हैं अगर वह 1 टन का हो तब वह सारा समय 1 टन से काम नहीं करता वह कितनी क्षमता से काम करता है इस बात पर निर्भर करता है कि अंदर आने वाली हवा कितनी करम है और कमरे का तापमान कितना है

हम पहले से धर्मो स्टार से तापमान सेट करते हैं और उच्च तापमान पर कमरे को रखने के लिए मोटर की स्पीड बदलती रहती है इस प्रकार जब कमरा ठंडा होता है तब उस कमरे को वहीं तापमान पर बनाए रखने के लिए

एक इनवर्टर एसी का मोटर कंप्लीट से चलता है और बिजली बचाता है वही एक नॉन इनवर्टर एसी अगर कमरे का तापमान को पहले से सेट किए गए तापमान पर बरकरार रखना हो तब वह उसी अपनी पूरी क्षमता के साथ और  साथ मोटर पूरी स्पीड के साथ काम करता है और हमेशा बिजली का ज्यादा उपयोग करता है

ड्यूल इनवर्टर एसी क्या है?

Source: LG.com

एक इनवर्टर एसी की कार्यक्षमता और भी बढ़ाने के लिए नई टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल कर कर यह नया डुअल रोटरी मोटर बनाया गया है जो बिल्कुल इनवर्टर एसी किस तरह  हीं चलता है इसका मूल्य कार्य  यह है कि वह इनवर्टर एसी की कार्यक्षमता और भी बढ़ाता है और  बिजली का उपयोग और भी कम कर देता है

अंतिम विचार

हमने इस पोस्ट में आपको इनवर्टर एसी नॉन इनवर्टर एसी के बीच अंतर उनके काम करने का तरीका फायदे और नुकसान.
यह बात बहुत जरूरी है कि एक ऐसी को अच्छे से चलने के लिए ऐसी को लगातार साफ करना बहुत जरूरी है इससे घर में पहले वाली हवा साथ रहती है और ऐसी भी बिजली कम इस्तेमाल करता है इससे एसी का टिकाऊ बढ़ जाता है

अभी भी  किसी बात  आपको किसी भी प्रकार का संदेह हो तो नीचे कमेंट में जरूर लिखें

धन्यवाद!!!

Source: WikipediaBijlibachaoAchrnews, Kitchenarena

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