जब भी हम पीने के पानी की बात करते है तब टीडीएस शद्ब ज़रूर सुनायी पड़ता है . थो आईये जानते है आखिर ये टीडीएस होता क्या है.

आखिर टीडीएस होता क्या है ? टीडीएस को खुलासे में जानते है

पानी जब अपने प्राकृतिक रूप में होता है तब उसमे कोई मिलावट नहीं होती. शुद्ध पानी में चर्वी, कैलोरीज या कोलेस्ट्रॉल बिलकुल भी नहीं होता .

शुद्ध पानी किसी भी तरह के मिलावट से दूर रहता है. लेकिन जब पानी प्रदूषण संपर्क होता है तब उसमे कई तरह के कीटाणु टॉक्सिक चीज़े मिलजाती है. यही साड़ी चीज़े इंसान के सेहत को खतरे में डालती है.

वैज्ञानिक साफ़ पानी के लिए इन िन्चिज़ों की शाह लेते है

ph
पानी में मिला हुआ ऑक्सीजन (oxygen)
पानी का रंग
हार्डनेस
पानी में बैक्टीरिया का विकास , एलगी (algae)
टोटल दिस्सोल्वेड सॉलिड्स

टोटल दिस्सोल्वेड सॉलिड्स

एक पानी के आनु (molecule) में एक हाइड्रोजन का परमाणु (atom) और एक ऑक्सीजन का परमाणु (atom) होते है .
पर जो पानी हम नदी में , नहर में या , धरती के अंदर पाया जाता है उस पानी में या गन नहीं होते . इसका कारण ये है की कई सारे जीविक और कई सारे तरह के नमक उस पानी में मिले होते है

 

इस पानी में कैल्शियम , पोटासियम , सुलफाटेस कार्बोनाट्स , नाइट्रेट्स एंड फ़्लोरिदेस जैसे कई सारे नमक के प्रकार मौजूद होते है

 

 

ये सब जानकार एक बड़ी लिस्ट जैसे लगने लगेगी लेकिन यह सच है की पानी में ऊपर बतायेगये सारे प्रकार के नमक मौजूद होते है .
पर सकर्मकथ बात ये है की इंसान के पूरी तरह से बढ़ाव के लिए ये सारे नमक अवश्य है. पीने के पानी में पूरा परिमाण होने पर हे पानी का स्वाद और उससे सेहत बानी रहती है

इन सारीचीज़े तब सही मात्रा में हो तब इंसान के सेहत पर कोईभी प्रभाव नहीं पड़ता लेकिन जब पानी में इंडस्ट्रीज से आये हुए धुवे या इंडस्ट्रीज से निकला कला पानी नदी के पानी में मिलजाता है तब उसमे आर्सेनिक लेड कभी कभी पारा (mercury) भी मिलजातेहै जो इंसान के सेहत के लिए काफी हानिकारक है.

टीडीएस एक मात्रा में जब पायी जाती है तब वो साकार होती है लेकिन जब वो अधिक हो जाती है तब पानी पीने के लायक नहीं रहता.

जब टीडीएस ५०० से ज़्यादा बढ़ जाता है तब वो सेहत के लिए काफी हानिकारक है जिससे किसीभी तरह से पानी से निकालना अवश्य है.

पानी की हार्डनेस पानी को पीने लायक नहीं रक्तही . पानी को हार्ड कैल्शियम(ca) और मैग्नीशियम(mg) बनाते है .

टीडीएस पानी में मिनरल्स की , नमक की ीोन्स की और मेटल्स की पूरी मात्रा है.
टोटल दिस्सोल्वेड सॉलिड्स (टोटल दिस्सोल्वेड solids) = पूरे केशन्स और ानिओंस है(पॉजिटिव और नेगेटिव चार्ज परमाणु )

बारिश का पानी सबसे शुद्ध मन जाट है जिसमे टीडीएस की मात्रा कुछ दस mg /l होती है
टीडीएस की मात्रा mg / l में टोली जाती है. जो पार्ट्स पैर मिलियन भी कहते है. ( एक मिलियन में कितने पार्ट है उसकी संख्या )

यह पानी जब पाइपलाइन से गुज़रता है तब अगर उस पाइप लाइन में जंग लगा हो तब पानी और भी खतर्नाक मिनरल्स को समां लेता है जैसे लेड और आयरन .

ज़मीन के अंदर काफी सारे गैस भी मौजूद होते है जो पानी से मिलजाते है. गैसेस जैसे नाइट्रोजन , मीथेन जब पानी में अधिक मात्रा में मिलजाते है तब पानी और भी खतरनाक बनजाता है बारिश का पानी जब ज़मीन से बेहटा है तब ज़मीन पर बसे इंडस्ट्रियल वेस्टसे आये हुए काफी सारे विशपूरतक पदार्थ को अपने में मिला लेता है . जिनमे घरोली गन्दगी मॉल मुता भी शमीउल होते है.

जैसे पानी का बहाव आगे बढ़ता है तब पानी में टीडीएस की मात्रा और भी बढ़ जाती है . इस टीडीएस को निकाल में हमे काफी सारा फिल्ट्रेशन करना पड़ता है

पानी म टीडीएस की मात्रा पानी के स्वाद पर भी अपना प्रभाव दिखता हैं

वर्ल्ड हेल्थ आर्गेनाईजेशन के मुताबिक कोई भी पानी जिसमे टीडीएस की मात्रा ३०० से काम हो वो पानी पीने के लिए सही मन जाट है . अगर पानी में टीडीएस की मात्रा ३०० से ६०० के बीच हो तब भी हम उस पानी को साफ़ कर के पी सकते है. लेकिन जब टीडीएस की मात्रा ९०० सेक्य १२०० या १२०० के ऊपर पहुँच जाती है तब पानी पीने के बिलकुल भी कायाक नहीं रहता . इस पानी को साफ़ करने में भी काफी चरण लग जाते है.

भारत में टीडीएस की मात्रा ५०० से ज़्यादा हो तब भी पीने के लायक नहीं मन जाता . लेकिन पानी के कमी को लेकर टीडीएस की मात्रा ५०० से ज़्यादा हो तब भी काफी सारे शहरों में इस पानी को पिया जाता है.

Bis के मुताबिक पानिमे ज़्यादा से ज़्यादा ३०० की मात्रा हे होनी चेहये .लेकिन पानी की कमी और अन्य कारन के वजह से ६०० तक परमिट है.

वर्ल्ड हेल्थ आर्गेनाईजेशन जो दुनियाकी सबसे बड़ी सेहत के सम्बंधित संघटन है, सारे विषय जैसे पानी की कमी और इंडस्ट्रीज का कूड़ा कचरा, कहती है की पानी जिसका टीडीएस का मात्रा १००० से काम है वो पानी पीने के लायक है. पर हमे ध्यान में रखना होगा की या बात सारे विषय को ध्यान में रखके बताई गयी है .

 

पानीमें टीडीएस की मात्रा को काम कैसे करे

बाजार में काफी सारे RO पूरिफिएर मौजूद है जिन्हे हम ऑनलाइन भी खरीद सकते है जो टीडीएस की इस मात्रा को काफी हद्द तक काम कर देते है और पानी को पीने लायक बना देते है .
सबसे ज़्यादा खरीदने वाला वाटर पूरिफिएर सिस्टम कार्बन फिल्ट्रेशन , रिवर्स ओसमोसिस , डिस्टिलेशन और डीओनिज़शन है .

कार्बन फिल्ट्रेशन

कार्बन फिल्ट्रेशन में चारकोल (लड़की का कोयला ) इस्ते माल करते है . जब पानी इस चारकोल से गुज़रता है तब पानी में बेस टॉक्सिक पदार्ध का नाश होता है

रिवर्स ओसमोसिस

इस प्रूरिफिएर में कई सारे मेम्ब्रेन (परदे ) होते है जिनसे पानी गुज़रकर साफ़ होता है. यह पानी को ९०% तक साफ़ करता है . ये पूरिफिएर सबसे पुराण और अधिक इस्तेमाल किये जाने वाला पूरिफिएर है.यहाँ पानी में रहने वाले किसी भी तरह के कीड़े या आँख से नज़र आने वाली बड़ी चीज़े जैसे के छोटे कंकर और कीड़े साफ़ होजाते है

रिवर्स ओसमोसिस सबसे ज़्यादा इस्तेमाल किये जाने वाला फिल्ट्रेटशन का तरीक़ा है. यह पानी में रहने वाले काफी पदार्थो की शुद्धि करदेता है.

रो वाटर पिरिफिएर में सिर्फ यही कमी रहती है की इसे इस्तेमाल करने के लिए काफी पानी होना ज़रूरी है. अगर आपके घर के ऊपर टैंक को तब आप Ro प्लांट कगकर पानी को शुद्ध कर सकते है.

अगर आपके पास ३ लीटर पानी है तब पानी फ़िल्टर होने के बाद सिर्फ २ लीटर हे वापस आता है. इसी वजह से हमने बताया की पानी की जरूयत ज़्यादा होती है Ro फ़िल्टर में .
एक Ro प्लांट की खीमात ८०००-१५००० (8000 -15000 ) rupay तक होती है.

आपको ये जानना ज़रूरी हो की जब पानी में टीडीएस की मात्रा अधिक हो तब Ro फ़िल्टर पानी को पूरी तरह से साफ़ नहीं कर सकता.

डिस्टिलेशन

पानी का डिस्टिलेशन पानी को साफ़ करने का सबसे पुराण तारीख है . इसमें पानी को ुबलया जाता है और जब पानी भाप बन जाता है तब उस भाप को ठंडी सतह पर लेजका र फिर पानी में बदल दिया जाता है .
इस क्रम में पानी में मिले हुए किसी भी तरह के कीटाणु का नाश होजाता है और वो कीटाणु डिस्टिलेशन के नीचे की और हे रहजाते है.

डीओनिज़शन

इस प्रक्रिया में पानिमे मिले हुए नमक को निकला जाता है.

ये प्रक्रिया कुछ इस प्रकार है : पानी में पहले इलेक्ट्रिक ions को मिलाया जाता है और इस ीोन्स की मदद से पानी को डीओनीसे किया जाता है. पानी में ीोन्स को मिलाने से पानी में मौजूद हुए नेगेटिव या पॉजिटिव ीोन्स न्यूट्रैलिजे होजाते है और पानी पीने लायक होजाता है. इस प्रक्रिया से पानी में टीडीएस की मात्रा काम होजाती है

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