साफ़ और शुद्ध पानी पीने के कई फायदे है. साफ़ और शुद्ध पानी इंसान को सहित मंद बनता है और तंदुरुस्ती काबिल रखता है.आज कल पानी , चाहे गांव में हो या शहर में, साफ़ मिलना मुश्किल है इसी कारण सही वाटर पूरिफिएर खरीदना महत्वपूर्ण है.

पानी में कए सारे नुक्सान दायक पदार्थ जैसे बैक्टीरिया, वायरस , खनिज पदार्थ जैसे लेड मैग्नीशियम और कैल्शियम भी मौजूद होते है. पानी जब खेत से गुज़रता है तन वह के पेरस्टिसिडऔर चेमिकल्स को अपने में जोड़ लेता है जिनसे एक सही वाटर पूरिफिएर हे साफ़ कर सकता है.

रिवर्स ओसमोसिस पूरिफिएर (RO), अल्ट्रा वायलेट पूरिफिएर (UV) उल्ट्राफिल्ट्रेशन (UF) ऐसे तीन महत्त्वपूर्ण तारीखे है जिनसे पानी को अछि तरह से साफ़ किया जा सकता है. yah तीन टेक्नोलॉजी भारत में प्रसिद्ध और आसानी में मिलने वाले वाटर पूरिफिएर है .

आएये अब जानते है इन तीन टेक्नोलॉजी में अंतर और समानता क्या है ? और कोनसे पानी के लिए हमे कोनसा वाटर पूरिफिएर इस्तेमाल करना चेहये .

इन चीज़ों को जान ने से पहले हमे कुछ परिभाषा के बारे में जानना ज़रूरी है जैसे टीडीएस जिसे हमने हमारे पिछले पोस्ट में मुख़्तसर रूप में समझाया है . पीन के पानी में टीडीएस की मात्रा

RO , UV और UF में अंतर

RO वाटर पूरिफिएर UV वाटर पूरिफिएर UF वाटर पूरिफिएर
इस्तेमाल करने में बिजली की ज़रूरत पड़ती है इस्तेमाल करने में बिजली की ज़रूरत पड़ती है इस्तेमाल करने में बिजली की ज़रूरत नहीं पड़ती
सारे बैक्टीरिया और वायरस को पानीसे साफ़ करदेता है पानिमे बैक्टीरिया और वायरस मर जाते है लेकिन मर कर भी पानी से साफ़ नहीं होते है पानी से सारे बैक्टीरिया और वायरस मार कर बहार निकला दिया जाता है
पानी के प्रेशर के लिए बिजली की ज़रुरत पढ़ती है नल के पानी से आये हुआ प्रेशर काफी है नल के पानी से आये हुआ प्रेशर काफी है
पानी में मिले हुए किसी भी तरह के नमल पदार्थ को निकाल देता है पानी में मिले नमक पदार्थ को नहीं निकाल सकते पानी में मिले नमक पदार्थ को नहीं निकाल सकते
RO पूरिफिएर में मैला पानी भी साफ़ कर सकते है इस पूरिफिएर में पानी साफ़ होने ज़रूरी है मैले पानी में भी काम करता है
RO वाटर पूरिफिएर UV वाटर पूरिफिएर UF वाटर पूरिफिएर
रिवर्स ओसमोसिस प्रोसेस के ज़रियर से पानी में मिले टीडीएस को भी साफ़ कर सकते है . इसे इस्तेमाल करने केलिए बिजली की ज़रूरत पड़ती है

पानी को फ़िल्टर में डालने से पहले प्रेफिल्ट्रेशन के ज़रिये से मैला पानी भी इसमें साफ़ किया जाता सकता है

पानी में मिले किसी भी तरह के वायरस या बैक्टीरिया को पूरी तरह से साफ़ किया जा सकता हैलेकिन पानी को नलके में से गुजरने के लिए बिजली अवश्य है. बिजली के ज़रिये से प्रेशर उपलब्ध होता है और पानी नलके में से गुज़रता है
रिवर्स ओसमोसिस में काफी पानी इस्तेमाल होता है . ३ लीटर पानी को साफ़ करके सिर्फ २ लीटर पानिहि हम इस्तेमाल कर सकते है

लेकिन वह मैला पानी वो बच गया है उसे हम पोछा लगाने में इस्तेमाल कर सकते है
काफी सारे RO वाटर पूरिफिएर ऑनलाइन और बाजार में उपलब्ध है लेकिन सस्ते वाटर पूरिफिएर पानिमे से मिनरल्स और नमक को अचे तरह से साफ़ नहीं कर सकते.

इस पूरिफिएर में बिजली की ज़रूरत सिर्फ पानी साफ़ करने में लगती है पर नलके में पानी लाने बिजली कीज़रूरत नहीं
इस वाटर पूरिफिएर बैक्टीरिया वायरस को काफी हद तक साफ़ करदेता है लेकिन मारे हुए बैक्टीरिया को पानीसे बहार नहीं निकलता

बचत के पूरिफिएर में UV सबसे खाबिल पूरिफिएर है . इस पूरिफिएर में किसी भी तरह के केमिकल का इस्तेमाल नहीं होता, नाकि ये पानी का स्वाद को बदलता है

इन पूरिफिएर को हम आसानी घर्म में रखकर इस्तेमाल करसाथे है और किसी भी तरह के अन्य खर्च नहीं होते है

अल्ट्रा फिल्ट्रेशन जिसे हम UV भी कहते है एक ऐसा वाटर पूरिफॉयर है जिससे हम पानी में मिले हर तरह के बैक्टीरिया वायरस या कई प्रकार के सोखमजीव को साफ करसकते है .

ये वाटर पूरिफिएर पानीको साफ करने में बिजली का उपयोग नहीं करता .

पानी से सारे बैक्टीरिया और वायरस को मार ने के बाद पानी से इनको बहार भी निकाल देता है

इसको इस्तेमाल करने में या नलके में पानी को डालने के लिए बिजली को जरीरत नहीं पड़ती .

लेकिन UV पूरिफिएर में एक हे कमी ये है की ये पानी से टीडीएस को नहीं काम करता .

अगर आपके पानी में काफी सारा टीडीएस मौजूद है तब आप इस पूरिफिएर को इस्तेमाल नहीं करसते है तब आप रिवर्स ओसमोसिस लेना बेहतरीन होगा .

RO vs UV

अल्ट्रा वायलेट पूरिफीकशन RO से किस प्रकार ललग है

RO वाटर पूरिफिएर पानी को अचे से साफ़ काढ़ा है, लेकिन कभी कभी सूक्ष्म जीव परदे में से निकल कर साफ़ पानी में आजाते है . या जीव काफी हानिकारक होसकते है जिनसे तयफोइड , कब्ज़ , हैज़ा जैसा बीमारी आ सकती है.

रो पूरिफिएर में सबसे बड़ी कमी ये है की इसमें काफी सारा पानी बर्बाद होता है. वो पानी पीने में इस्तेमाल नहीं किया जा सकता लेकिन अन्य कामो में इस्तेमाल किया जा सकता है .

परन्तु UV वाटर पूरिफिएर में पानी की बर्बादी बिलकुल भी नहीं होती जितना पानी हम साफ़ करने के लिए डालते है उठना पानी साफ़ होकर आता है .

Uv वाटर पूरिफिएर को मेन्टेन करनेमे किसी भी तरह का खर्च नहीं होता , पर Ro पूरिफिएर में काफी खर्च आ सकता है.
लेकिन Uv वाटर पूरिफिएर आर्सेनिक , लीडजिअसे पदार्थ पानी से साफ़ नहीं कर सकता.

RO vs UV vs UF

अल्ट्रा फिल्ट्रेशन RO और Uv से किस तरह अलग है ?

अल्ट्रा फिल्ट्रेशन जिसे हम UV भी कहते है एक ऐसा वाटर पूरिफॉयर है जिससे हम पानी में मिले हर तरह के बैक्टीरिया वायरस या कई प्रकार के सोखमजीव को साफ करसकते है . ये वाटर पूरिफिएर पानीको साफ करने में बिजली का उपयोग नहीं करता .

पानी से सारे बैक्टीरिया और वायरस को मार ने के बाद पानी से इनको बहार भी निकाल देता है

इसको इस्तेमाल करने में या नलके में पानी को डालने के लिए बिजली को जरीरत नहीं पड़ती.

RO पूरिफिएर में सबसे बड़ी कमी ये है की इसमें काफी सारा पानी बर्बाद होता है. वो पानी पीने में इस्तेमाल नहीं किया जा सकता लेकिन अन्य कामो में इस्तेमाल किया जा सकता है .

परन्तु UV वाटर पूरिफिएर में पानी की बर्बादी बिलकुल भी नहीं होती जितना पानी हम साफ़ करने के लिए डालते है उठना पानी साफ़ होकर आता है .

Uv वाटर पूरिफिएर को मेन्टेन करनेमे किसी भी तरह का खर्च नहीं होता , पर Ro पूरिफिएर में काफी खर्च आ सकता है.
लेकिन Uv वाटर पूरिफिएर आर्सेनिक , लीडजिअसे पदार्थ पानी से साफ़ नहीं कर सकता.

UV पूरिफिएर में बिजली की ज़रूरत सिर्फ पानी साफ़ करने में लगती है पर नलके में पानी लाने बिजली कीज़रूरत नहीं
इस वाटर पूरिफिएर बैक्टीरिया वायरस को काफी हद तक साफ़ करदेता है लेकिन मारे हुए बैक्टीरिया को पानीसे बहार नहीं निकलता.

UV से Uf इस प्रकार अलग है को वह बिना किसे रेडिएशन्स पानी को साफ़ करता है.

अंतिम शब्द

जब भी हमे साफ़ पानी का इस्तेमाल करना हो तब हमे ये जाना ज़रूरी है की पानी में कोनसी प्रकार की गंदगी ज़्यादा है.और टीडीएस की मात्रा कितनी है . तब हम फैसला कर सकते है कीकोनसा पूरिफिएर खरीदे .

अगर आपको किसी भी तरह की संदेह हो थो आप कमेंट ज़रूर करे , आपका संदेह दूर करने में हमे ख़ुशी होगी.

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